प्रेम कभी समाप्त नहीं होगा।
Story by- jai chaurasiya क्या हुआ इतनी बेचैन क्यों हो...?? मुझे एक अजीब सा डर लग रहा है। कैसा डर..?? मै तो अभी तुम्हारे साथ हूं और तुमने भोर में यहां क्यों बुलाया हम कही कैफे में भी मिल सकते थे। मैं तुमसे अकेले मिलना चाहती थी जहां हमारी खामोशी भी बात करे.. इस झील का ठहराव और शीतलता ये मेरी पसंदीदा जगह है..... तुम मुझे पहले कभी यहां नहीं लाई... कोशिश की थी पर तुम रास्ते से लौट गए। ये वही जगह है जहां मैने तुम्हे पिछले जन्मदिन में बुलाया था...!! क्या हुआ बताओगी...??? आज फिर से मेरे मन में वही सवाल है क्या हम मिल पाएंगे कभी...??? "हाँ.. बिल्कुल"। एक दिन अवश्य..!! बस तुम्हारा ये कहना मुझे विश्वास दे जाता है या शायद यही सुनने के लिए मैं सवाल करती हूं! ये सुनकर मेरा मन विश्वास से भर जाता है.. थोड़ी प्रतीक्षा और सही... विश्वास और गहरा होता है.. और प्रेम तो है ही!! पर तुम इतनी चिंतित क्यों हो..?? इतने दूर रहते हो तुम मुझसे कभी कभी तो दिन भर बात नहीं होती सुबह के मैसेज का उत्तर शाम को देते हो और इस समय आभाव से थोड़ी कटुता आती तो है। लेकिन मेरा तुम्हारे मैसेज का समय प...