तुम मुझे पढ़ती होगी।
Story by- jai chaurasiya दुःख सोचता हूं दिन रात इसलिए दुःख को आकर्षित करता हु - अपनी ओर सुख का सभी पर्याय दूर रहता है मुझसे... जैसे कि प्रेम और प्रेम की कल्पना...!! मुझे पता है तुम आज भी मेरे बारे में सोचती होगी.. सोचती होगी और ढूंढती होगी मुझे मेरे... कहानियों में मेरी लिखावट में....!! मैं जनता हूं कि जब भी "तुम मुझे पढ़ती होगी" ये जानने की कोशिश करती होगी कि... हर दिन कैसा महसूस करता हूं कैसे जी रहा हूं मैं?? मुझे पता है तुम्हारा सबसे बड़ा डर ये होगा की कही मै तुम्हारे दायरे से बाहर तो नहीं आ गया..?? या फिर तुम्हे भूल तो नहीं गया..?? तुम मुझे शायद इसलिए भी पढ़ती होगी कि ये दर्द जो मैं लिखता हु ये तुम्हारे दिए हुए है जबतक मैं दर्द लिखता रहूंगा तुम्हारी हमदर्दी रहेगी मुझसे और घमंड रहेगा खुद पर और बेपरवाह रहोगी तुम और जिस दिन मैं तुम्हारे दायरे से बाहर आ जाऊंगा.. उस दिन कुछ तो टूटता हुआ महसूस करोगी तुम.... और तुम्हे मेरा लिखना अप्रत्याशित चोट पहुंचाएगा। तुम्हारे अंदर एक खींझ उठेगी जिसे तुम बयां नहीं कर पाओगी और तुम एक अनचाही चिंता में डूब जाओगी की क्या तुमने पूरी तरह से...