प्रेम का आरंभिक दौर।। Prem kar aarambhika daur

Story by- jai chaurasiya



क्या तुम्हे हमारे वो पुराने दिन याद है, हम दोनों अजनबी थे फिर मैने तुम्हें hii का वो पहला मैसेज किया जिसका रिप्लाई करने में तुमने पूरा दिन लगा दिया। 
मुझे याद है वो तुम्हारा Hallo का पहला मैसेज जिसे देखकर मेरे खुशी का कोई ठिकाना न था।
फिर धीरे धीरे हमारी बात शुरू हुई और ये कब प्यार में बदल गई।

तुम्हे याद है....???
प्रेम का वो आरंभिक दौर..
घंटों बात करना
बात करते - करते सो जाना 
उसके एक call या text की प्रतीक्षा में सारा ध्यान फोन पर ही रखना
उसके बारे में हर वक्त सोचना और मुस्कुरा देना 
जागते हुए कल्पनाएं बुनना 
साथ हंसना खिलखिलाना और कभी कभी उदास हो जाना।

फिर धीरे धीरे बातें कम हो गई
अब तो तुम्हारा प्रेम और बात करना एक औपचारिकता सा लगता है..
मैं मानता हु समय के साथ लगाव कम होने लगता है, लेकिन प्रेम तो समय के साथ और गहरा होता है न...
मानता हु की अब उतना समय नहीं होता होगा तुम्हे, लेकिन इतना समय तो निकाला जा सकता है कि स्वयं मैसेज करके पूछ लो कि खाना खाया क्या, और हां या न में बात खत्म न करके ये भी पूछ लिया जाए कि क्या खाया...!

सुनो...
अब दोबारा से शुरू करते है...
जहां बाते भले ही कम हो लेकिन प्रेम अथाह हो वही पहली बार वाला प्रेम 
हमें एक दूसरे के साथ उबाऊ न लगे
और जैसे हमारा प्रेम अनंत हो वैसे हमारा साथ भी अनंत हो जिंदगी के आखिरी पड़ाव तक...
प्रेम का प्रभाव वैसा हे रहे पहली बार की तरह...

सुनो न...
तुम्हे मेरे कहने से कुछ नहीं करना, हो सकता है अब मैं उबाऊ लगता हु तुम्हे, तुम्हे कोई और पसंद हो जिसके साथ शायद तुमने जीने मरने की कसम खाई हो।
तो फिर मुझे आजाद कर दो न...
मैं पूरी तरह से तुम्हारे गिरफ्त में हु मुझे निष्कर्ष तक पहुंचा दो...

लेकिन तुम्हारा निर्णय जो भी हो मै तुम्हे सदैव प्रेम करता रहूंगा हो सकता है समाज के द्वारा मै किसी अनचाहे बंधन में बंध जाऊ लेकिन तुम्हारे लिए मेरा प्रेम सदैव वो पहले वाला प्रेम रहेगा। अद्भुत, अप्रतिम, आसाधारण ,अनंत।


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