Love and emotions

Story by- jai chaurasiya





हम जिससे प्यार करते है, या जिसे पसंद करते है उससे भी हम अपनी सारी भावनाएं, डर और दुःख साझा नहीं कर पाते।

नहीं बता पाते हम उन्हें जब हमे उनकी बहुत ज्यादा याद आती है, बस उन्हें बेवजह संदेश भेजकर परेशान करते है उनसे बेफिजूल की बाते करते है, यूं ही बाते दोहराते रहते है। वो कुछ पल के लिए भी ओझल हो जाए तो मन व्यथित हो जाता है बेकार की आशंका में डूब जाता है, यदि सपने में भी कुछ गलत दिख जाए तो उससे रात भर नींद नहीं आती सारी रात बस उन्हीं के बारे में सोचते हुए कटती है कब सुबह हो और सुप्रभात का संदेश आए।
हमे खुद से ज्यादा उनकी फिक्र रहती है, हम खुद से ज्यादा उनकी सलामती और खुशी की प्रार्थना करते है। उनकी चेहरे की खुशी हमारे दिल को सुकून पहुंचती है। और यदि वो परेशानी में हो तो मन बेचैन हो जाता है लगता है कि कैसे सब ठीक कर दिया जाए, काश ये परेशानी मेरे हिस्से आती या फिर मै क्यों वहां नहीं हूं।

उनको परेशान जानकर हम बेवजह परेशान हो जाते है, हमारी नींद और भूख दोनों खत्म हो जाती है हम केवल उनकी खैरियत सुनना चाहते है। और जब पाते है असमर्थ खुद को उनकी मदद कर पाने में तब हमें खुद के होने पर भी अफसोस होता है।

क्योंकि जब हम किसी के प्रेम में होते है तो हम खुद को भूल जाते है हमे केवल उसका ख्याल रहता है, हमें फर्क नहीं पड़ता अपनी भूख से हमारे ध्यान में मात्र ये रहता है कि उसने खाना खाया कि नहीं हम उनके लिए वो सब करने को तैयार रहते है जो उनके लिए अच्छा होता है। हम उनसे चीज़ें अपनी तकलीफें छुपा लेते है कि कही उसे परेशानी न हो हमे लगता है वो भी हमे प्रेम करती है इसलिए हमे चीजें छिपानी पड़ती है। हम भले ही खाना न खाए पर सदैव पूछने पर अभी खाया है बताना पड़ता है। अंततः हम उनके भले के लिए उनसे भी दूर हो जाते है कभी कभी हमेशा के लिए भी क्योंकि सच्चा प्रेम वही है, हमे अपनी खुशी या दुःख से फर्क नहीं पड़ता हम चाहते है वो खुश रहे।ठीक वैसे हे, जैसे मैने देखा है माँ पापा भी तो यही करते है बच्चों के भविष्य के लिए वो उन्हें अपने से दूर भेज देते है उनके अच्छे के लिए भले ही उन्हें कितनी भी तकलीफ हो, आसान तो नहीं होता होगा ऐसा निर्णय लेना फिर भी लेते है क्योंकि ज़रूरी है। 

प्रेम आजादी का विषय है, प्रेम में हम किसी को कैद में नहीं रखते, उसे आजाद करते है सभी बंधनों से हम चाहते है वो ऊंचाइयों को छूएं, प्रेम में हम वो वो सब करते है जिससे उसको खुशी मिले हम प्रेम में स्वार्थहीन हो जाते है। अगर उसे हमसे बेहतर कोई मिल जाए तब भी हमे उसके लिए खुशी ही होगी कि शायद मैं उसके काबिल नहीं और दुःख वो तो खत्म नहीं होता। क्योंकि प्रेम यदि दोनों तरफ से सामान है तो वो कहीं नहीं जाता हर परिस्थिति में वापस लौट ही आता है ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार एक काबिल बेटा अच्छा इंसान बनकर माँ पापा के पास लौट आता है।


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