तुम मुझे भूल पाओगी क्या...!!!

Story by- jai chaurasiya



नाराजगी जायज है तुम्हारी...
तुम्हें जो सबसे दूर कर रहा हूं।

तुम नहीं सुन ना चाहती मुझे 
फिर भी तुम्हें मजबूर कर रहा हूं।

इश्क किया है ...
कोई मुसलसल खेल नहीं है ...

तुम्हारे ऊपर लिख के पंक्तियां
खुद को मशहूर कर रहा हूं।।


बिछड़े अरसा हो गया है तुमसे, तुम फिर कभी मिल पाओगी क्या? 

मेरी शायरी तो समझ लेती हो एक बार में

मेरा इश्क समझ मेरी मोहब्बत बन पाओगी क्या.. ?

उस रोज मसर्रत दी थी जो अंगूठी तुमने वो आज भी बेबाक पड़ी है

उसे आकर फिर से पहना जाओगी क्या?

वो तुम पूछती हो ना की तुम मुझे भूल क्यू नहीं पाते!!

तो पूछो खुद से ...

तुम मुझे भूल पाओगी क्या? 


तुम्हें पाना अपना बनाना तो बस ख्वाहिश थी मेरी 

मेरी ख्वाहिश को पूरा कर पाओगी क्या 

वो जो हर रोज हमसे छिप के मिलना था ... वो सब फिर से दोहराओगी क्या ...?

तुम्हें बालकनी में खड़ा देख पीछे से तकना तो आदत थी मेरी.... 

मेरी जान मेरी चाहत मेरी आदत बन पाओगी क्या ... ?

और वो जो तुम पूछती हो ना की तुम मुझे भूल क्यू नहीं पाते ...

तो पूछो खुद से तुम मुझे भूल पाओगी क्या? 


जो गई हो इस कदर छोड़ के हमें तुम वापस आ पाओगी क्या ?? 

हर रात जो तुम्हारे साथ होती थी calls पे 

तुम उसे फिर से आजमाओगी क्या 

वो जो सुकून मिला था तुम्हारी बांहों में आ के तुम गले लगा के मुझे फिर से अपना बनाओगी क्या ..?

वो तुम पूछती हो ना की तुम मुझे भूल नहीं पाते

तो बताना ज़रा

 तुम मुझे भूल पाओगी क्या?


हां मालूम है मुश्किल है बहुत मुश्किल है सब कुछ पहले जैसा हो पाना

पर नींद ना आए रातों को तो मुझे याद करना फिर सो जाना 

मैं लिखता रहूंगा शायरी तुम पर तुम जवाब देना फिर मुस्कुराना

खुदा ने चाहा तो फिर जरूर मिलेंगे पर तब तक तुम किसी और की ना हो जाना 

हां अभी तुम्हारा इंतजार है हां भी दिल बेकरार है

हां नहीं भूल पाता मैं तुम्हें क्योंकि शायद मुझे अब भी तुमसे प्यार है ।।

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