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Showing posts from October, 2025

मैं बेवफाई पे नहीं लिखता।

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Story by- Jai Chaurasiya   उनको ये शिकायत है मैं बेवफ़ाई पे नही लिखता, और मैं सोचता हूँ कि मैं उनकी रुसवाई पे नही लिखता.' 'ख़ुद अपने से ज़्यादा बुरा ज़माने में कौन है मैं इसलिए औरों की बुराई पे नही लिखता.' 'कुछ तो आदत से मज़बूर हैं और कुछ फ़ितरतों की पसंद है , ज़ख़्म कितने भी गहरे हों मैं उनकी दुहाई पे नही लिखता.' 'दुनिया का क्या है हर हाल में इल्ज़ाम लगाती है, वरना क्या बात कि मैं कुछ अपनी सफ़ाई पे नही लिखता.' 'शान-ए-अमीरी पे करू कुछ अर्ज़ मगर एक रुकावट है, मेरे उसूल, मैं गुनाहों की कमाई पे नही लिखता.' 'उसकी ताक़त का नशा "मंत्र और कलमे" में बराबर है !! मेरे दोस्तों!! मैं मज़हब की लड़ाई पे नही लिखता.' 'समंदर को परखने का मेरा नज़रिया ही अलग है यारों!! मिज़ाज़ों पे लिखता हूँ मैं उसकी गहराई पे नही लिखता.' 'पराए दर्द को मैं ग़ज़लों में महसूस करता हूँ , ये सच है मैं पेड़ से फल की जुदाई पे नही लिखता.' तजुर्बा तेरी मोहब्बत का ना लिखने की वजह बस ये!! क़ि 'शायर' इश्क़ में ख़ुद अपनी तबाही पे नही लिखता ! Not mine दोस्त...

हम मिले...

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Story by- jai chaurasiya हम अजनबी थे पहले, अलग-अलग जीवन जीते थे। हमें एक - दूसरे की कोई खबर तक न थी।  जिंदगी यूं ही गुजर रही थी....!!! हम दोनों अपने में ही व्यस्त थे... हमारे अपने काम काज थे... मैंने भी हमेशा स्वयं के लिए ही सोचा... एक दिन अचानक से सब बदल गया... हमारी मुलाक़ात हुई... मैंने कभी आपसे बात करने की नहीं सोची... रिश्ते की सोची और हामी भर दी.. अचानक से आपके संदेश से मन में कई विचार आए... लेकिन जो कि जरूरी था मैने भी जवाब दिया... बातचीत का सिलसिला ऐसा हो जाएगा मैने कभी सोचा न था... जो बात सीमित होनी थी, वो बढ़ती चली गई... और उम्मीद है कि वो, कभी खत्म न होगी... मुझे कभी नहीं पता था कि आप एक दिन मेरे लिए घर जैसा महसूस करेंगी। अब... खाने से पहले, मुझे आशा है कि आपने खा लिया। सोने से पहले, मुझे आशा है कि आप आराम करेंगे। इससे पहले कि मैं कुछ भी चाहता हूं, मैं आपके लिए कामना करता हूं – खुश रहें, शांति से रहें, अपने दिल में रोशनी महसूस करें। मुझे नहीं पता कि यह कैसे हुआ, लेकिन आप सुबह में मेरा पहला विचार और रात में मेरा आखिरी विचार हैं । आपके संदेश समय से न आने से, मन का व्यथित ...

खूबी तुम्हारी...!!

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Story by- jai chaurasiya खूबी तुम्हारी, तुम्हे कितना गिनवाउंगा.. मुझे यकीन है , मैं थक जाऊंगा।। तुम्हे देख मेरे मन में एक ख्याल आता है रब किसीको बनाने में इतनी मासूमियत कहा से लाता है।। तारीफ में तुम्हारी एक दिन, आसमान से फरिश्ते बुलाऊंगी तुम्हारी खूबसूरती के किसी, तुम्हे उन्हीं से सुनवाऊंगा।। हर एक के दिल में तुम्हे पाने की तमन्ना होगी तुम्हे मुझपे यकीन न हो तो उनकी आंखों में दिखाऊंगा।। मासूमियत, इंसानियत और मोहब्बत, इन सबका भी एक चेहरा होता है.. तुम फुर्सत से आईने के सामने आओ , तुम्हे उस शख्स से मिलवाऊंगा।। तुम्हे सटीक से बयान करे , ऐसे और शब्द कहा से लाऊंगा.. मुझे यकीन है मैं थक जाऊंगा।। दोस्तो, आपको हमारा ये आर्टिकल कैसा लगा कॉमेंट के माध्यम से जरूर बताए। अगर आपके पास भी कोई कहानी या आर्टिकल हैं जिसे आप हमारे ब्लॉग मे साझा करना चाहते हैं तो आप हमको e-mail- hintsforlifeinhindi@gmail.com या हमारे :  What's app हमे भेज सकते हैं जिसे हम आपके नाम और फोटो के साथ सझा करेंगे।

एक बार लिख दो..!!

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Story by- jai chaurasiya एक बार करके ऐतबार लिख दो... कितना है मुझसे प्यार लिख दो... कटती नहीं ये जिंदगी, अब तेरे बिन... कितना करूं और इंतेज़ार लिख दो...।। तरस रहे है बड़ी मुद्दत से... इस बार अपनी मोहब्बत का इजहार लिख दो... दीवाने हो जाएं जिसे पढ़ के हम... कुछ ऐसा तुम मेरा नाम लिख दो...। एक बार करके ऐतबार लिख दो.. ख्वाहिशें अपनी दो - चार लिख दो कर सका पूरी तो मुकम्मल है जिंदगी नहीं तो चाहे गुनहगार लिख दो...!! ज्यादा नहीं लिख सकते तो मत लिखो.. मोहब्बत भरे लफ्ज़ दो - चार लिख दो.. एक बार लिखो मोहब्बत है तुमसे.. फिर यही बात बार - बार लिख दो..। दोस्तो, आपको हमारा ये आर्टिकल कैसा लगा कॉमेंट के माध्यम से जरूर बताए। अगर आपके पास भी कोई कहानी या आर्टिकल हैं जिसे आप हमारे ब्लॉग मे साझा करना चाहते हैं तो आप हमको e-mail- hintsforlifeinhindi@gmail.com या हमारे : What's app हमे भेज सकते हैं जिसे हम आपके नाम और फोटो के साथ सझा करेंगे।

तुझे इश्क हो...!!

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Story by- jai chaurasiya तुझे इश्क हो खुदा करे, तुझे उस से कोई जुदा करे.. तेरे होंठ हंसना भूल जाए, तेरी आंख नम रहा करे.. तू उसकी बाते किया करे, तू उसकी बातें सुना करे... तुझे दोस्ती भी न रास आए, तू तन्हा तन्हा फिरा करे... उसे देख कर तू रुक जाए, वो नजर झुका कर मिला करे... तेरे ख्वाब बिखरें टूट कर, तू टुकड़ों को चुना करे... तुझे हिज़्र की वो झरी लगे, तू मिलन की बस दुआ करे... तुझे इश्क पर फिर यकीन हो, तुझे हिज़्र की वो झरी लगे... तुझे हिज़्र की वो झरी लगे, तू मिलन की हर पल दुआ करे... तुझे इश्क पर फिर यकीन हो, उसे तस्बियों (माला) पर गिना करे... तू गली - गली सदा करे, तू शहर - शहर फिरा करे... फिर मैं कहूं इश्क ढोंग है, तू नहीं - नहीं किया करे... दोस्तो, आपको हमारा ये आर्टिकल कैसा लगा कॉमेंट के माध्यम से जरूर बताए। अगर आपके पास भी कोई कहानी या आर्टिकल हैं जिसे आप हमारे ब्लॉग मे साझा करना चाहते हैं तो आप हमको e-mail- hintsforlifeinhindi@gmail.com या हमारे : What's app हमे भेज सकते हैं जिसे हम आपके नाम और फोटो के साथ सझा करेंगे।

तुम मुझे भूल पाओगी क्या...!!!

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Story by- jai chaurasiya नाराजगी जायज है तुम्हारी... तुम्हें जो सबसे दूर कर रहा हूं। तुम नहीं सुन ना चाहती मुझे  फिर भी तुम्हें मजबूर कर रहा हूं। इश्क किया है ... कोई मुसलसल खेल नहीं है ... तुम्हारे ऊपर लिख के पंक्तियां खुद को मशहूर कर रहा हूं।। बिछड़े अरसा हो गया है तुमसे, तुम फिर कभी मिल पाओगी क्या?  मेरी शायरी तो समझ लेती हो एक बार में मेरा इश्क समझ मेरी मोहब्बत बन पाओगी क्या.. ? उस रोज मसर्रत दी थी जो अंगूठी तुमने वो आज भी बेबाक पड़ी है उसे आकर फिर से पहना जाओगी क्या? वो तुम पूछती हो ना की तुम मुझे भूल क्यू नहीं पाते!! तो पूछो खुद से ... तुम मुझे भूल पाओगी क्या?  तुम्हें पाना अपना बनाना तो बस ख्वाहिश थी मेरी  मेरी ख्वाहिश को पूरा कर पाओगी क्या  वो जो हर रोज हमसे छिप के मिलना था ... वो सब फिर से दोहराओगी क्या ...? तुम्हें बालकनी में खड़ा देख पीछे से तकना तो आदत थी मेरी....  मेरी जान मेरी चाहत मेरी आदत बन पाओगी क्या ... ? और वो जो तुम पूछती हो ना की तुम मुझे भूल क्यू नहीं पाते ... तो पूछो खुद से तुम मुझे भूल पाओगी क्या?  जो गई हो इस कदर छोड़ के हमें तु...